गुरुवार, 30 अगस्त 2012

140 . प्यार के वादे भूल गये

140 . 

प्यार के वादे भूल गये 
वफ़ा के रिश्ते तोड़ दिये 
बीच मंझधार में लाकर नैया 
मुझको क्यों तुम छोड़ गये 
कहते थे साथ जियेंगे साथ मरेंगे 
न होंगे कभी तुमसे जुदा 
होगा हमारा साथ सदा 
न जाओ ऐ जाने वफ़ा 
हम तो हैं तुझपे फ़िदा 
गलियां सुनी कलियाँ रोये 
खिलने से पहले हम मुरझाये 
तूँ हँसती तो कलियाँ चटखते 
बागों में बहार आ जाये 
जैसे चंदा बादल से झाँके 
ऐसे ही तूँ मुझको लागे 
तेरे बिना मैं ऐसे तरपूं 
जैसे जल बिन मछली 
साँझ सवेरे मनवा रोये 
याद तेरी जब - जब सताये 
तेरे विरह की दर्द में 
मन मेरा रो - रो गाये !

सुधीर कुमार ' सवेरा '  04-06-1980 
चित्र गूगल के सौजन्य से  

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें