रविवार, 7 अक्तूबर 2012

152 . चीनी मिट्टी के प्याले में रंगहीन पानी

152.

चीनी मिट्टी के प्याले में रंगहीन पानी 
लगी चाँदी सी 
पकड़ने की घुंडी 
बता जाती है तेरी जवानी 
यहीं से शुरू होती है 
अपनी ये प्रेम कहानी 
चीनी घुली ये चाय का पानी 
बता जाती है तेरी ये रसीली जवानी 
निम्बू का ये खट्टापन 
कहता है तेरा नटखटपन 
तेरा ये चुलबुलापन 
कहता है ये निचला पानी 
निचे का ये जमा दाना 
बता जाता है तेरा तराना 
प्याला रखने का अंदाज 
कह जाते हैं मन के छिपे अल्फाज 
लिकर की छिपी हुई कहानी 
बस है यही एक 
तेरे प्यार की निशानी 
ओंठ के लगते ही 
ख़त्म हो जाती है ये कहानी 
तेरे अंग का वो किनारा 
जैसे चाँद है घिरा 
लेकर बादलों का सहारा 
चूमेगा कोई उसको 
होगा जो सपनो का तेरा सह्जादा 
गायेगा केवल गीत 
अपनी लुटी प्यार का ये " सवेरा "
तेरे गेशुओं के छाँव में 
होगा अपना ठाँव 
भींगेंगे हम तो 
तेरे काजलों की बरसात में 
तेरी लम्बी पतली ग्रीवा 
सुराघट से लग रहा जुड़ा 
तेरे रसीले ओठों का 
मैं तो हूँ एक दिवाना  
तेरे सिर के एक जुम्बिस में 
होता हूँ मैं फ़ना - फ़ना !

सुधीर कुमार ' सवेरा '  20-09-1980
चित्र गूगल के सौजन्य से  

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें