सोमवार, 8 सितंबर 2014

295 .और क्या देखने को बाँकी रहा !


२ ९ ५.
और क्या देखने को बाँकी रहा !
तुझसे दिल लगा कर देख लिया !!

वो हमसे ख़फ़ा हैं , हम उनसे ख़फ़ा हैं !
मगर बात करने को उनसे जी चाहता है !!

हमने उनसे वफ़ा की उम्मीद लगायी !
जो जानते न थे वफ़ा क्या चीज है !!

बात - बात पे लोग सजा देते हैं !
आशिक मैं क्या हुआ की गुनहगार हो गया हूँ !!

अल्लाह करे तुमको भी हो चाह किसी की !
फिर मेरी तरह तूँ भी ताके राह किसी की !!

दिखा कर मुंह छिपा लेना हया इसको नहीं कहते !
लगा कर दिल हटा लेना वफ़ा इसको नहीं कहते !!

तुम सलामत रहो , घर गैर का आबाद रहे !
तुमको क्या कोई साद रहे या कोई नाशाद रहे !!

हमारी बेबकूफी थी जो तुमसे दिल लगाया था !
ज़माने से बिगाड़ी थी तुम्हे अपना बनाया था!

नहीं मिलते न मिलिए खैर कोई मर न जायेगा !
खुदा का शुक्र है पहले मोहब्बत आपने कम की !!

हम भी कुछ खुश नहीं वफ़ा करके !
तुमने अच्छा ही किया निबाह न की !!

ज़माने से शिकवा न कर ऐ दिल !
जमाना नहीं साथ देता किसी का !!

यह भी गर खता है तो बेशक हुई खता !
अपना समझ के तुमको पुकारा कभी - कभी !!

सुधीर कुमार ' सवेरा '

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