सोमवार, 30 मार्च 2015

428 .कुछ ख्यालात बुरे

४२८ 
कुछ ख्यालात बुरे 
कुछ हालात बुरे 
कुछ ऑंखें बुरी 
कुछ निगाहें बुरी 
कुछ दूरियाँ बुरी 
कुछ नजदीकियां बुरी 
कभी वफ़ा बुरी 
कभी जफ़ा बुरी 
कभी दिन का चैन बुरा 
कभी रातों की नींद बुरी 
किसी के लिए हम बुरे 
मेरे लिए तुम बुरे 
कुछ हकीकत बुरे 
कुछ अफ़साने बुरे 
दिल के आईने में 
सूरत अपनी सबसे बुरे !

सुधीर कुमार ' सवेरा ' 
११ - ०८ - १९८६ 

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