रविवार, 2 अक्तूबर 2016

602 . भगवती गीत


                                    ६०२ 
                            भगवती गीत 
जागहु हे जगदम्ब जननि मोरि , हरिए सकल दुख सारे। 
तुअ दरशन बिनु नैन विकल भेल , कखन देखब देवि तारे।।
हम अबला अवलम्ब दोसर नहि , केवल तोहर भरोसे। 
तोहें जगतारिणि  देहु एहो वर , सेवक करहु परोसे।।
हमर विकल मन धान दसो दिसि , की गति होएत मोरे। 
अशरण शरण धयल हम तुअ पद , तोहरे चरण गति मोरे।।
तोहें जगतारिणि  शत्रु संहारिणि , सेवक होउ ने सहाये। 
हरषि हेरिय देवि सुदिष्ट नयन , भरि संकट करिय तराने। 
होउ प्रसन्न देवि पुरहु सकल मन , दीअ अभय वरदाने।।
( मैथिल भक्त प्रकाश )

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