मंगलवार, 12 मई 2015

478 . यम का दंड बड़ा भयंकर

४७८ 
यम का दंड बड़ा भयंकर 
पर होता नहीं उनके लिए 
माँ चरणो में जो रत रहते 
आचार्य बंधू और सखा भी 
उनके तो सब कुछ माँ ही होते !

सुधीर कुमार ' सवेरा '

477 . पावर पद संपत्ति मान भरपूर

४७७ 
पावर पद संपत्ति मान भरपूर 
हो न जाना घमंड में चूर 
देना होगा सारा हिसाब वहाँ 
आएगा न कोई काम जहाँ 
माँ के चरणो में मन लगा 
क्लेश हंटा पीड़ा भगा !

सुधीर कुमार ' सवेरा ' 

सोमवार, 11 मई 2015

476 . मोह ममता है झूठी

४७६ 
मोह ममता है झूठी 
भोग झूठे आशा झूठी 
कहते सभी सुनते सभी 
दिन रात इन्ही में पड़े 
तभी तो कहते हैं 
यही है अविद्याग्रस्त जीवन !

सुधीर कुमार ' सवेरा '

रविवार, 10 मई 2015

475 . छत नभ के विस्तृत हैं

 ४७५ 
छत नभ के विस्तृत हैं 
पर अपने - अपने खोल लो 
उड़ो आकाश में दूर - दूर 
आश्रय चाहिए तुझको मन में 
जगत ही है जल रहा 
अनान्द्ग्नी है बस माँ में !

सुधीर कुमार ' सवेरा '

शनिवार, 9 मई 2015

474 . क्या मैं कहूँ

४७४ 
क्या मैं कहूँ 
कौन सी वह राह है ?
जो आती है यहाँ 
जो जाती है वहाँ 
तुम पार हो तो कैसे ?
कहाँ पर थाह है ?
थाम लो माँ के चरण 
थाह ही थाह है !

सुधीर कुमार ' सवेरा '

473 . कँपाते थे जगत को जो

४७३ 
कँपाते थे जगत को जो 
कीर्ति पताका जिनका था नभ पर 
नाम बस शेष बचा है उनका 
निशान नहीं कहीं उनकी समाधी का !

सुधीर कुमार ' सवेरा '

शुक्रवार, 8 मई 2015

472 . सुख और शांति

४७२ 
सुख और शांति 
गर हो चाहते 
माँ के चरणो में 
ध्यान अपना लगाओ 
माया में मन 
लगाने से भला 
शांति मिल पाते ?
व्यर्थ हो भटकते 
औरों से क्या आशा 
कौन आकर देगा जगा 
कौन भला देगा मिला 
मेरे लिए करेगा कौन साधन 
व्यर्थ है झूठी आशा 
बहलाते जी गर यूँ ही रहे 
एक दिन ठगे जावोगे 
अपना ही जीवन भटकाओगे !

सुधीर कुमार ' सवेरा '