230 . जी रहे हैं सभी जिन्दगी के नाम पर मौत भी रो रही है जिनके नाम पर दफ़न होते नहीं कोई मरकर जिन्दे जी दफनाये जाते हैं कफ़न भी रोये जा रही है जिनके नाम पर बेदागदार दामन पर भी दागों के निशां रोते हैं ! सुधीर कुमार " सवेरा " 21-05-1983 चित्र गूगल के सौजन्य से
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