शुक्रवार, 8 मई 2015

471 . एक दो तीन

४७१ 
एक दो तीन 
हो रहा क्षीण 
पर रहा बीन 
ऐसे मधुर क्षण 
मृत्युपरांत भी जो 
बने रहेंगे अमृत कण !

सुधीर कुमार ' सवेरा '

गुरुवार, 7 मई 2015

470 . भर कर मन में मैल खुद

४७० 
भर कर मन में मैल खुद 
ढूंढते हो सच्चे संत इधर - उधर 
कहते हो मिलते अब वो किधर 
अपना अहंकार तुम छोड़ नहीं पाते 
बांध कर मुष्टि में अहंकार तुम 
भटकोगे अगर तुम  जीवन भर भी
हाथ अपने मगर कुछ न पावोगे !

सुधीर कुमार ' सवेरा '

बुधवार, 6 मई 2015

469 . है हम पे उपकार उसका

४६९ 
है हम पे उपकार उसका 
जो हमारा अपकार निंदा करता 
भोग तो है मेरे भाग्य का 
अहसान उसका मेरा अशुभ बाँटता !

सुधीर कुमार ' सवेरा '

सोमवार, 4 मई 2015

468 . महत्व नहीं इसका


४६८ 
महत्व नहीं इसका 
अब तक क्या किया 
योजनाएं हैं क्या ?
व्यर्थ बकवाद भरा  
महत्व इसमें है 
मैं कर रहा क्या 
सावधानी उत्कंठा 
है कितना भरा हुआ !

सुधीर कुमार ' सवेरा '

रविवार, 3 मई 2015

467 . परमाणु के केंद्र में


४६७ 
परमाणु के केंद्र में 
विश्व विखण्डनी महाशक्ति 
जल बिंदु में है 
महती शीतलता भरती 
जानते नहीं खुद को जब तक 
क्षुद्र हैं , मानते क्षुद्र जब तक 
जानने का नाम है 
हम चैतन्य अनंत तक !

सुधीर कुमार ' सवेरा ' 

शनिवार, 2 मई 2015

466 . प्रशंसनीय तुम कर्म करो


४६६
प्रशंसनीय तुम कर्म करो 
मत चाहो पाना  प्रशंसा 
अन्यथा मन में उपजेगी 
औरों के प्रति हिंसा 
क्या यह देगा तुझको शोभा ?
क्यों उपजाते मन में अहंकार का पौधा !

सुधीर कुमार ' सवेरा '  

शुक्रवार, 1 मई 2015

465 . मिलते जब लोगों से

४६५ 
मिलते जब लोगों से 
तो रखो इतना ध्यान 
या गुण गाओ संत का 
या ईश्वर का गुणगान 
पर की निंदा भारी पाप 
मत भरो मन में 
औरों की विष्ठा आप !

सुधीर कुमार ' सवेरा '