ADHURI KAVITA SMRITI
रविवार, 23 जून 2013
264 . शरीफ हैं वो
२ ६ ४ .
शरीफ हैं वो
जो सामाजिक
राजनीतिक और सरकारी
गुंडों से त्रस्त हो
जो सब कुछ सहता हुआ
सहमता हुआ
हर अन्याय पर भी
खामोश हो
हर आशा जिसकी
बेवफा हो
लोगों ने सिर्फ
जिससे
विश्वासघात किया हो !
सुधीर कुमार ' सवेरा' ' २ ६ - ० ४ - १ ९ ८ ४
कोलकाता ६ - ५ ० pm
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