गुरुवार, 13 नवंबर 2014

327 .लंबे - लंबे ये कदम

३२७ 
लंबे - लंबे ये कदम 
रखो जरा संभाल के 
खो न जाये कहीं तेरा वजूद 
हर पग उठाओ संभाल के 
अतीत में ढूंढे कहीं 
जो न मिलो कभी 
बनाओ वो तारीख जरा 
खुद अपने ख्याल से 
हर लम्हा शुष्क हो रहा 
यूँ बैठो न उदास से 
फूंको ऐसी जान की 
जर्रा - जर्रा हिल जाये तूफान से 
सोयी तेरी वफ़ा की आग 
सुला दे न मुझको जगा के 
कतरा - कतरा - कतरा - कतरा 
है तुम्हारे लिए 
रखना इसे संभाल के 
हर दर्द है सीने में छुपा 
दस्तक न देना कभी प्यार से 
हम तो जल मरे हैं 
तेरी ही बेवफाई के आग से 
हमको न जिलाना फिर कभी 
अपने वफ़ा के याद से 
दफ़न ही हो जाने दो मुझे 
निकालो न मुझे 
अपने यादों के कब्र से 
कभी भूलेंगे न तुझको हम 
कभी जिएंगे वफ़ा  की याद में 
कभी जल मरेंगे 
बेवफाई की आग में !

सुधीर कुमार ' सवेरा ' कोलकाता 

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