गुरुवार, 27 अप्रैल 2017

746 . अधिर कलेवर जानु हे कमलक पात जल तूल हे।।


                                       ७४६ 
अधिर कलेवर जानु हे कमलक पात जल तूल हे।
भवन कनक जन रजत आदि जात धिर नहि रह सब जने। 
सुत मित सब धन सुख दुख शरीर अधिर जानल सब मने। 
सिरजन शरीर ई ई सबका मन नृप अवयव दासे। 
मनहि पाबय पुने अधरम अपजस मन बसे पाव एत पासे।।
जगत प्रकाश आस कएल तोहर चान्दशेखर सिंह भाय। 
जगतजननि पथ हे थिर राखह दुहू जनक दुहू काय।।
                                   ( मैथिली शैव साहित्य )

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