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जननी , तोहर चरण जौं पाबी।
मलयानिल चर्चित चरणाम्बुज - छवि पर शीश चढावी।।
जननी , तोहर चरण जौं पाबी।।
गंधराज कलिकोष - उर्मिला सँ नख - पंक्ति दहाबी ,
परमानन्द विभोर - मगन - मन उर - पंकज फलकाबी।।१।।
माटी पानि , गोधन तन - भूतल मोर मराल नचाबी ,
संयम शील बढ़य जन गण मन सौरभ पाबि गुलाबी।।२।।
वीणक गुंज - कुंज सागर - तट - निर्झर - कंठ - सलाबी।
दिवाराति संध्या ऊषा पर नयन नीर छलकाबी।।३।।
गरुता अपन शारदा - धरणी पर हिलकोरि बहाबी।
समटि स्वतंत्र - मंत्र गंधारणव रव आकण्ठ घुलाबी।।४।।
जननी , तोहर चरण जौं पाबी।
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