ADHURI KAVITA SMRITI
गुरुवार, 2 अगस्त 2012
110 . कहते हैं जो मुझे अपना दिलवर
110 .
कहते हैं जो मुझे अपना दिलवर
बनते हैं जो मेरे जाने ज़िगर
उनसे अब मैं खुद क्या कहूँ
उनहोंने मुझ पर ढाया कैसा कहर
याद उनकी जाती ही नहीं दिल से
दिल खून के आँसू बहाता हर पल
बस उनसे इल्तिजा है इतनी मेरी
याद न अब मुझको आयें किसी पल !
सुधीर कुमार ' सवेरा '
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें
नई पोस्ट
पुरानी पोस्ट
मुख्यपृष्ठ
सदस्यता लें
टिप्पणियाँ भेजें (Atom)
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें