शनिवार, 11 मार्च 2017

705 . कालिके ------------- जयति जगदम्बिके काली , चरण उर धारि बैसल छी।


                                      ७०५
                                    कालिके 
 जयति जगदम्बिके काली , चरण उर धारि बैसल छी। 
जगत के झूठ ममता मोह , मन सौं टारि बैसल छी।
न जप - तप - ध्यान हम जानी न पूजा पाठ गुरु सेवा।।
जगज्जननीक पूजा - दीप टा हम बारि बैसल छी।
बिताओल तीन पन जगमे बन्हैतहि पाप के मोटा। अपन उद्धार आशा लय विनत हम हारि बैसल छी।
दुखी पद - किंकरी ' ललितेश्वरी ' दिशि हेरु मा काली। 
विकल शरणागता बनि अम्बिके चौपाड़ि बैसल छी।
                                                       ललितेश्वरी देवी 

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